कृष्ण भजन लिरिक्स

वारे से रे कुँआरे से मोरी लागी लगन वंशी वारे से लिरिक्स

वारे से रे कुँआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।



केसी है वंसी और कैसो कन्हैया,

कैसो है वो यसोदा को छैया,
देखो नैया किनारे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से,
बारे से रे कुँआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।



बिन मांगे कई खो मिल गए सावरिया,

भजत बीत गई कई उमरिया,
कई के लोट गए दुआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से,
बारे से रे कुँआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।



जी दिन मोहन की पड़ है नजरिया,

ले वे खो आहे वे तुमरी खवारिया,
बिनाई निमंत्रण डारे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से,
बारे से रे कुँआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।



एरी सखी अब मुह ना मरोड़ो,

कन्हैया से अब आसा ने टोरो,
सुन है जरूरई पुकारे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से,
बारे से रे कुँआरे से,
मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।



वारे से रे कुँआरे से,

मोरी लागी लगन वंशी वारे से।।

प्रेषक – दुर्गा प्रसाद पटेल।
9713315873


Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!