कृष्ण भजन लिरिक्स

अरी ओ श्याम की बंशी ना यूँ हमको सताया कर लिरिक्स

अरी ओ श्याम की बंशी,
ना यूँ हमको सताया कर,
तू गाकर गीत बिरहा के,
तू गाकर गीत बिरहा के,
ना बैरन यूँ जलाया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।



तेरी तक़दीर अच्छी है,

तू रहती पास मोहन के,
कभी मोहन से मिलने की,
सिफारिश तो लगाया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।



कृष्ण कर कमलों से अपने,

चरण तेरे दबाते है,
ना इतनी सेवा ओ सजनी,
मेरे प्रभु से कराया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।



हमेशा प्रेम का गाना,

सुनाया कर अरी मुरली,
ना यूँ ही चमन के आंसू,
मेरी बैरन बहाया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।



तुम्हारा जिगर छल्ली है,

हमारा अंग अंग जख्मी,
तू अपनी तीखी तानो से,
ना जख्मों को जलाया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।



अरी ओ श्याम की बंशी,

ना यूँ हमको सताया कर,
तू गाकर गीत बिरहा के,
तू गाकर गीत बिरहा के,
ना बैरन यूँ जलाया कर,
अरी ओ श्याम की बँशी,
ना यूँ हमको सताया कर।।


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